Wednesday, June 27, 2012

अपना शहर ……

 अजनबी शहर में अपना शहर याद आया |
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया ||
 मिला सब यहाँ जो मिला ना था अब तक,
इस शहर ने हर सपने को बनाया हकीकत |
हर उडान पे वो पतंग का उडाना याद आया ,
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया ||
 घूमा बहुत मैं और देखी भी बहुत दुनिया,
सपनों की नगरी से लगे बहुत से नगर |
पर अपने शहर सा  कोई भी ना शहर पाया,
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया ||
 सोचते थे प्यार लोगों से होता है जगह से नही,
समझे तब जब उससे मीलों दूर हम आ बैठे |
उसकी मोहब्बत में खुद को जकडा पाया,
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया ||
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया ...........




 जब देखा गली पे बच्चों को खेलते क्रिकेट,
और फिर अपने ही शीशे के टूटने की आवाज |
अपने बचपन का सुहाना दौर याद आया,
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया ||







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