You are the twinkle of my eyes The smile on my lips; The joy of my face; Without you I am incomplete.
Wednesday, June 27, 2012
क्योंकि वह पिता हैं
पिता। ऐसा शब्द, जो मजबूती का एहसास कराता है। उसके होने से दुनिया से लड़ने
की ताकत आ जाती है। कहते हैं कि जो चीज हमारे पास होती है, उसकी अहतियत कम
हो जाती है। जिनके पिता हैं, और ‘पैरों पर खड़े’ हो गए हैं, उनके लिए शायद
पिता के होने या न होने का ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, लेकिन जब एक बच्चा,
जिसके पिता नहीं है, किसी बच्चे को अपने पिता की उंगली पकड़कर जाते हुए
देखता, तो उसके दिल में झांक देखें तो पता चलेगा कि पिता की अहमियत क्या
है? ‘फादर्स डे’ पर अच्छी-अच्छी बातें की जाती हैं। कई लोग बताते हैं कि
कैसे उनके पिता ने उन्हें मुसीबतें झेलकर जवान किया, किसी काबिल बनाया। कुछ
ऐसे भी हैं, जो अक्सर पिता से कहते सुने जाते हैं, ‘सभी अपनी औलाद के लिए
कष्ट झेलते हैं, आपने क्या नया कर दिया?’ या यह कि ‘आपने हमारे किया ही
क्या है?’ इस तरह के शब्द सुनने वाले पिता पर क्या गुजरती होगी, यह वही
जानता है। उस पिता को रात में नींद नहीं आती, जिसे पता चले कि जिस बेटे को
इंजीनियर बनाने के लिए दूसरे शहर में भेजा और जिसकी पढ़ाई के लिए उसने सब
कुछ दांव पर लगा दिया, वह किसी महिला की चेन लूटता हुआ पकड़ा गया है। पिता
का अतीत कितना भी काला रहा हो, लेकिन उसकी भी दिली ख्वाहिश यही होती है कि
उसकी संतान किसी काबिल बने।
‘फादर्स डे’ पर बच्चों को जानना चाहिए कि उनके पिता ने उन्हें भले ही जमाने की सुख-सुविधाएं नहीं दी हों, लेकिन उसकी ख्वाहिश तो सारे जहां की नेमतें अपने बच्चों को देने की होती है। ऐसा नहीं होता है, तो गलती पिता की नहीं, हालात और मजबूरी की होती है। पिता के प्यार को दौलत की तराजू में नहीं तौला जा सकता। उसको तौलने के लिए तो दिल की तराजू चाहिए। जब आप पिता-पुत्र के प्यार को तोलेंगे, तो पिता के प्यार का पलड़ा भारी रहेगा। उस सूरत में भी जब पिता की नाफरमानी करते हुए संतान उनका दिल दुखा चुकी हो। इस ‘फादर्स डे’ पर अपने पिता के दिल में झांकिए और देखिए कि वह आपसे कितना प्यार करते हैं?
‘फादर्स डे’ पर बच्चों को जानना चाहिए कि उनके पिता ने उन्हें भले ही जमाने की सुख-सुविधाएं नहीं दी हों, लेकिन उसकी ख्वाहिश तो सारे जहां की नेमतें अपने बच्चों को देने की होती है। ऐसा नहीं होता है, तो गलती पिता की नहीं, हालात और मजबूरी की होती है। पिता के प्यार को दौलत की तराजू में नहीं तौला जा सकता। उसको तौलने के लिए तो दिल की तराजू चाहिए। जब आप पिता-पुत्र के प्यार को तोलेंगे, तो पिता के प्यार का पलड़ा भारी रहेगा। उस सूरत में भी जब पिता की नाफरमानी करते हुए संतान उनका दिल दुखा चुकी हो। इस ‘फादर्स डे’ पर अपने पिता के दिल में झांकिए और देखिए कि वह आपसे कितना प्यार करते हैं?
अपना शहर ……
अजनबी शहर में अपना शहर याद आया |
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया ||
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया ||
मिला सब यहाँ जो मिला ना था अब तक,
इस शहर ने हर सपने को बनाया हकीकत |
हर उडान पे वो पतंग का उडाना याद आया ,
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया ||
इस शहर ने हर सपने को बनाया हकीकत |
हर उडान पे वो पतंग का उडाना याद आया ,
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया ||
घूमा बहुत मैं और देखी भी बहुत दुनिया,
सपनों की नगरी से लगे बहुत से नगर |
पर अपने शहर सा कोई भी ना शहर पाया,
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया ||
सपनों की नगरी से लगे बहुत से नगर |
पर अपने शहर सा कोई भी ना शहर पाया,
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया ||
सोचते थे प्यार लोगों से होता है जगह से नही,
समझे तब जब उससे मीलों दूर हम आ बैठे |
उसकी मोहब्बत में खुद को जकडा पाया,
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया ||
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया ...........
समझे तब जब उससे मीलों दूर हम आ बैठे |
उसकी मोहब्बत में खुद को जकडा पाया,
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया ||
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया ...........
जब देखा गली पे बच्चों को खेलते क्रिकेट,
और फिर अपने ही शीशे के टूटने की आवाज |
अपने बचपन का सुहाना दौर याद आया,
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया ||
और फिर अपने ही शीशे के टूटने की आवाज |
अपने बचपन का सुहाना दौर याद आया,
उसकी हर गली हर एक मोड याद आया ||
Wednesday, March 14, 2012
Love Forever

Koi mila hi nahi jis ko wafa date.
Her ik ne dokha diya kis kis ko saza dete.
ye humara zarf tha k khamosh rahe
dastan sunate to mehfil ko rula dete.

Aagar mere yaad aye to
ek Chand ko dekh lena
ye soch k nahi k kubsoorat hi kitna
ye soch kar k
hazaroon sitaron may tanha hai kitna

ise hamne chaha usko hum pa na sake,
jisne hame chaha use chah na sake,
ye to dil tutane ka khel tha,
kisi ka toda apna bacha na sake.
Meri myat uthaane ki jab baat ho gi.Har aankhon mein aanso ki barsaat ho gi.
Mere kafan pe hans k ek phool rakh dena.
Jaate jaate tumhaari koi nishaani paas ho gi.

Maut ke baad yaad aa raha hai koi,
Mitti meri kabra se utha raha hai koi,
Ae khuda do pal ki zindagi aue de de,
Meri kabra se udaas ja raha hai koi.

Wo Maire Pyar Ka Kis Qadar Mazak Ura Gaya
Ke Muje Muhabbat Krne Ki Saza Suna Gaya
Huma Ne Muhabbat Ka Agaz Us Se Hi Kiya Tha
Or Wohi Is Ko Injam Tak Phocha Gayaa

Request hai tumse refuse mat karna,
Friendship ke ye dosti ko fuse mat karna,
Hum dost hai tumahre con-fuse mat karna,
Meri jagah kisi aur ko use mat karna…

Sapno ki tarah aa kar chale gaye
Apno ko bhula kar chale gaye
Kis baat ki saza di aap ne humein
Pehle hasaya phir rulakar chale gaye…
Bhool jane ka tujhe koi irada na tha,Tere siva kisi se kiya wada na tha.
Nikaal dete Dil se shayed tumhen KHAYAL,
Par is kambakht dil mein koi Darwaza na tha…

Ishq kar deta hai bekrar
bhar deta hai pathar ke dil me pyar,
kyu nahi milti zindagi ki ye bahar,
kyunki ishq ka dusra naam hai intezar…

Kisi ne humse puchha,
Vaade aur Yaadein me kya fark hai?
Hum ne kaha Vaade insan todta hai,
Aur Yaadein insan ko tod deti hain…

Kisi ek se karo pyaar itna,
Ke kisi aur se pyaar karne ki gunjaish na rahe,
Woh muskrade aap ko dekh kar ek bar,
Toh zinadgi se phir koi khwaish na rahe…
Friday, November 25, 2011
मेरी दुल्हन सी रातों को
बदनाम रहे बटमार मगर,घर तो रखवालों ने लूटा
मेरी दुल्हन सी रातों को,
नौलाख सितारों ने लूटा
दो दिन के रैन-बसेरे में,
हर चीज़ चुरायी जाती है
दीपक तो जलता रहता है,
पर रात पराई होती है
गलियों से नैन चुरा लाई,
तस्वीर किसी के मुखड़े की
रह गये खुले भर रात नयन,
दिल तो दिलदारों ने लूटा
जुगनू से तारे बड़े लगे,
तारों से सुंदर चाँद लगा
धरती पर जो देखा प्यारे
चल रहे चाँद हर नज़र बचा
उड़ रही हवा के साथ नज़र,
दर-से-दर, खिड़की से खिड़की
प्यारे मन को रंग बदल-बदल,
रंगीन इशारों ने लूटा
हर शाम गगन में चिपका दी,
तारों के अधरों की पाती
किसने लिख दी, किसको लिख दी,
देखी तो, कही नहीं जाती
कहते तो हैं ये किस्मत है,
धरती पर रहने वालों की
पर मेरी किस्मत को तो
इन ठंडे अंगारों ने लूटा
जग में दो ही जने मिले,
इनमें रूपयों का नाता है
जाती है किस्मत बैठ जहाँ
खोटा सिक्का चल जाता है
संगीत छिड़ा है सिक्कों का,
फिर मीठी नींद नसीब कहाँ
नींदें तो लूटीं रूपयों ने,
सपना झंकारों ने लूटा
वन में रोने वाला पक्षी
घर लौट शाम को आता है
जग से जानेवाला पक्षी
घर लौट नहीं पर पाता है
ससुराल चली जब डोली तो
बारात दुआरे तक आई
नैहर को लौटी डोली तो,
बेदर्द कहारों ने लूटा ।
Tuesday, November 1, 2011
गम
मौसम को इशारो से बुला क्यो नही लेते
रुठा है अगर वो तो मना क्यो नही लेते
दीवाना तुम्हारा कोई गैर नही है
मचला भी तो सीने से लगा क्यो नही लेते
खत लिख के कभी और कभी खत को जलाकर
तन्हाई को रंगीन बना क्यों नही लेते
तुम जाग रहे हो मुझको अच्छा नही लगता
चुपके से मेरी नींद चुरा क्यो नही लेते
**************************
जो दिल ने कही लब पे कहाँ आई है देखो
अब मेहफिल-ए-यारा मे भी तन्हाई है देखो
फुलो से हवा भी कभी घबराई है देखो
घुचो से भी शबनम कभी कतराई है देखो
अब ज़ौक़-ए-तलब वजह-ए-जुनून ठहर गया है
और अर्ज़-ए-वफा बाईस-ए-रुसवाई है देखो
गम अपने ही अश्को का खरीदार हुआ है
दिल अपनी ही हालत का तमाशाई है देखो
**************************
प्यार के उजाले मे गम का अंधेरा आता क्यो है
जिसे हम चाहे वही हमे रुलाते क्यो है
अगर वो मेरा नसीब नही
तो खुदा ऐसे लोगो से मिलाता क्यो है
रुठा है अगर वो तो मना क्यो नही लेते
दीवाना तुम्हारा कोई गैर नही है
मचला भी तो सीने से लगा क्यो नही लेते
खत लिख के कभी और कभी खत को जलाकर
तन्हाई को रंगीन बना क्यों नही लेते
तुम जाग रहे हो मुझको अच्छा नही लगता
चुपके से मेरी नींद चुरा क्यो नही लेते
**************************
जो दिल ने कही लब पे कहाँ आई है देखो
अब मेहफिल-ए-यारा मे भी तन्हाई है देखो
फुलो से हवा भी कभी घबराई है देखो
घुचो से भी शबनम कभी कतराई है देखो
अब ज़ौक़-ए-तलब वजह-ए-जुनून ठहर गया है
और अर्ज़-ए-वफा बाईस-ए-रुसवाई है देखो
गम अपने ही अश्को का खरीदार हुआ है
दिल अपनी ही हालत का तमाशाई है देखो
**************************
प्यार के उजाले मे गम का अंधेरा आता क्यो है
जिसे हम चाहे वही हमे रुलाते क्यो है
अगर वो मेरा नसीब नही
तो खुदा ऐसे लोगो से मिलाता क्यो है
दर्द
तुम्हे भूल जाऊ ये होता नही
कोई वक़्त हो दर्द सोता नही
ना हो जाओ बदनाम तुम इस लिये
मै रो रो के दामन भीगोता नही
ये वो फसल है जो उगे खुद-बा-खुद
कोई दर्द के बीज बोता नही
ये माना के तूफान का ज़ोर है
मै घबरा के कश्ती डुबोता नही
कोई वक़्त हो दर्द सोता नही
ना हो जाओ बदनाम तुम इस लिये
मै रो रो के दामन भीगोता नही
ये वो फसल है जो उगे खुद-बा-खुद
कोई दर्द के बीज बोता नही
ये माना के तूफान का ज़ोर है
मै घबरा के कश्ती डुबोता नही
बिजली
अब तो घबरा के ये कहते है के मर जायेंगे
मर के भी चैन ना पाया तो किधर जायेंगे
तुम ने ठहराई अगर गैर के घर जाने की
तो इरादे यहाँ कुछ और ठहर जायेंगे
हम नही वो जो करे खून का दवा तुझ पर
बलकी पूछेगा खुदा भी तो मुकर जायेंग़े
आग दोज़ख की भी हो जायेगी पानी पानी
जब ये आसी अर्क़-ए-शर्म से तर जायेंग़े
शोला-ए-आह को बिजली की तरह चमकाऊ
पर मुझे डर है, कि वो देख के डर जायेंगे
लाये जो मस्त है तुरबत पे गुलाबी आंखे
और अगर कुछ नही, दो फूल तो डर जायेंगे
नही पायेगा निशान कोई हमारा हरगीज़
हम जहाँ से रवीश-ए-तीर-ए-नज़र जायेंगे
पहुचेंगे रहगुज़र-ए-यार तलक हम क्योकर
पहले जब तक ना दो आलम से गुज़र जायेंग़े
मर के भी चैन ना पाया तो किधर जायेंगे
तुम ने ठहराई अगर गैर के घर जाने की
तो इरादे यहाँ कुछ और ठहर जायेंगे
हम नही वो जो करे खून का दवा तुझ पर
बलकी पूछेगा खुदा भी तो मुकर जायेंग़े
आग दोज़ख की भी हो जायेगी पानी पानी
जब ये आसी अर्क़-ए-शर्म से तर जायेंग़े
शोला-ए-आह को बिजली की तरह चमकाऊ
पर मुझे डर है, कि वो देख के डर जायेंगे
लाये जो मस्त है तुरबत पे गुलाबी आंखे
और अगर कुछ नही, दो फूल तो डर जायेंगे
नही पायेगा निशान कोई हमारा हरगीज़
हम जहाँ से रवीश-ए-तीर-ए-नज़र जायेंगे
पहुचेंगे रहगुज़र-ए-यार तलक हम क्योकर
पहले जब तक ना दो आलम से गुज़र जायेंग़े
मुक्कमल खत
उसे मैने ही लिखा था
के लहजे बर्फ हो जाये तो पिगला नही करते
परींदे डर के उड जाये तो फिर लौटा नही करते
उसे मैने ही लिखा था
यक़ीन उठ जाये तो शायद कभी वापिस नही आता
हवाओ का कोई तूफान कभी बारिश नही लाता
उसे मैने ही लिखा था
के शीशा टूट जाये तो कभी फिर जुड नही पाता
जो रास्ते से भटक जाये वो वापिस मुड नही पाता
उसे कहना अधुरा खत उसे मैने ही लिखा था
उसे कहना के दीवाने मुक्कमल खत लिखा नही करते
के लहजे बर्फ हो जाये तो पिगला नही करते
परींदे डर के उड जाये तो फिर लौटा नही करते
उसे मैने ही लिखा था
यक़ीन उठ जाये तो शायद कभी वापिस नही आता
हवाओ का कोई तूफान कभी बारिश नही लाता
उसे मैने ही लिखा था
के शीशा टूट जाये तो कभी फिर जुड नही पाता
जो रास्ते से भटक जाये वो वापिस मुड नही पाता
उसे कहना अधुरा खत उसे मैने ही लिखा था
उसे कहना के दीवाने मुक्कमल खत लिखा नही करते
बहाना
साथ जो है तुम्हारा तो हर पल सुहाना लगता है
ना होगा कभी कोई गम ऐसा मुझे लगता है
जानते तो नही है के मुस्तक़बिल मे लिखा क्या है
गर जो तुम साथ ना हुए तो डर लगता है
इस पहेली को भुझाने मे एक ज़माना लगता है
है सच ये के उदास हो तुम मुझ से दुर होकर
पर हंसता चेहरा तुम्हारा एक बहाना सा लगता है
ना होगा कभी कोई गम ऐसा मुझे लगता है
जानते तो नही है के मुस्तक़बिल मे लिखा क्या है
गर जो तुम साथ ना हुए तो डर लगता है
इस पहेली को भुझाने मे एक ज़माना लगता है
है सच ये के उदास हो तुम मुझ से दुर होकर
पर हंसता चेहरा तुम्हारा एक बहाना सा लगता है
आईना-ए-दिल
येही वफा का सिलाह है, तो कोई बात नही
ये दर्द तुम ने दिया है, तो कोई बात नही
येही बहुत है के तुम देखते हो साहिल से
सफीना डूब रहा है, तो कोई बात नही
रखा था अशियाना-ए-दिल मे छुपा के तुमको
वो घर तुमने छोड दिया है तो कोई बात नही
तुम ही ने आईना-ए-दिल मेरा बनाया था
तुम ही ने तोड दिया है तो कोई बात नही
किसे मजाल कहे कोई मुझ को दीवाना
अगर ये तुमने कहा है तो कोई बात नही
ये दर्द तुम ने दिया है, तो कोई बात नही
येही बहुत है के तुम देखते हो साहिल से
सफीना डूब रहा है, तो कोई बात नही
रखा था अशियाना-ए-दिल मे छुपा के तुमको
वो घर तुमने छोड दिया है तो कोई बात नही
तुम ही ने आईना-ए-दिल मेरा बनाया था
तुम ही ने तोड दिया है तो कोई बात नही
किसे मजाल कहे कोई मुझ को दीवाना
अगर ये तुमने कहा है तो कोई बात नही
सवाल
ये दर्द मिट गया तो फिर?
ये ज़ख्म सिल गया तो फिर?
बिछड कर सोचता हूँ मै,
वो फिर से मिल गया तो फिर?
मै तित्लियो के शहर मे,
रहूँ तो मुझ को फिक्र है
वो फूल जो खिला नही,
वो फूल खिल गया तो फिर?
तुझे भी कुछ नही मिला,
मुझे भी कुछ नही मिला,
तमाम उम्र के लिये,
ये दर्द मिल गया तो फिर?
मै इस लिये तो आज तक,
सवाल भी ना कर सका
अगर मेरे सवाल का,
जवाब मिल गया तो फिर?
ये ज़ख्म सिल गया तो फिर?
बिछड कर सोचता हूँ मै,
वो फिर से मिल गया तो फिर?
मै तित्लियो के शहर मे,
रहूँ तो मुझ को फिक्र है
वो फूल जो खिला नही,
वो फूल खिल गया तो फिर?
तुझे भी कुछ नही मिला,
मुझे भी कुछ नही मिला,
तमाम उम्र के लिये,
ये दर्द मिल गया तो फिर?
मै इस लिये तो आज तक,
सवाल भी ना कर सका
अगर मेरे सवाल का,
जवाब मिल गया तो फिर?
रात के सन्नाटे मे
किसी की आँखों मे मोहब्बत का सितारा होगा
एक दिन आएगा कि कोई शक्स हमारा होगा
कोई जहाँ मेरे लिए मोती भरी सीपियाँ चुनता होगा
वो किसी और दुनिया का किनारा होगा
काम मुश्किल है मगर जीत ही लूगाँ
किसी दिल को मेरे खुदा का अगर ज़रा भी सहारा होगा
किसी के होने पर मेरी साँसे चलेगीं कोई तो होगा
जिसके बिना ना मेरा गुज़ारा होगा
देखो ये अचानक ऊजाला हो चला,
दिल कहता है कि शायद किसी ने धीमे से मेरा नाम पुकारा होगा
और यहाँ देखो पानी मे चलता एक अन्जान साया,
शायद किसी ने दूसरे किनारे पर अपना पैर उतारा होगा
कौन रो रहा है रात के सन्नाटे मे
शायद मेरे जैसा तन्हाई का कोई मारा होगा
अब तो बस उसी किसी एक का इन्तज़ार है,
किसी और का ख्याल ना दिल को ग़वारा होगा
ऐ ज़िन्दगी! अब के ना शामिल करना
मेरा नाम ग़र ये खेल ही दोबारा होगा
एक दिन आएगा कि कोई शक्स हमारा होगा
कोई जहाँ मेरे लिए मोती भरी सीपियाँ चुनता होगा
वो किसी और दुनिया का किनारा होगा
काम मुश्किल है मगर जीत ही लूगाँ
किसी दिल को मेरे खुदा का अगर ज़रा भी सहारा होगा
किसी के होने पर मेरी साँसे चलेगीं कोई तो होगा
जिसके बिना ना मेरा गुज़ारा होगा
देखो ये अचानक ऊजाला हो चला,
दिल कहता है कि शायद किसी ने धीमे से मेरा नाम पुकारा होगा
और यहाँ देखो पानी मे चलता एक अन्जान साया,
शायद किसी ने दूसरे किनारे पर अपना पैर उतारा होगा
कौन रो रहा है रात के सन्नाटे मे
शायद मेरे जैसा तन्हाई का कोई मारा होगा
अब तो बस उसी किसी एक का इन्तज़ार है,
किसी और का ख्याल ना दिल को ग़वारा होगा
ऐ ज़िन्दगी! अब के ना शामिल करना
मेरा नाम ग़र ये खेल ही दोबारा होगा
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